क्या यमुना वाकई बदली है या बस कैमरे का एंगल? TDS मीटर ने बताई सच्चाई, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी का नाम बीते वर्षों में प्रदूषण, झाग और बदबू से ही जोड़ा जाता रहा है। बीते कई सालों से नदी की हालत इतनी भयावह हो चुकी है। हर साल छठ पूजा जैसे पवित्र पर्वों पर श्रद्धालुओं की जहरीले झाग के बीच उतरकर अर्घ्य देने की फोटो वीडियो गंभीर चर्चा का विषय बनते रहे हैं।

ऐसे दृश्य न केवल दिल्ली की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हैं, बल्कि इस बात का भी प्रमाण हैं कि राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण नदी किस हद तक मर चुकी है। ऑक्सीजन स्तर लगभग शून्य, और जल में मौजूद जीवन पूरी तरह खत्म। हालाँकि अब सरकार कुछ और ही दावे करती नजर आ रही है।

सरकार के ‘युद्धस्तरीय सफाई अभियान’ के दावे

12 साल बाद नई सरकार आने के बाद राजधानी में यमुना की सफाई को लेकर बड़े पैमाने पर विज्ञापन और अभियान चलाए गए। सरकार ने दावा किया कि “यमुना को साफ करने का मिशन युद्ध स्तर पर चल रहा है।” सोशल मीडिया पर वीडियो, पोस्ट और बयान आने लगे जिनमें बताया गया कि अब यमुना पहले जैसी नहीं रही।

लेकिन अभी भी केजरीवाल की आप पार्टी इस सफाई को “प्रचार की राजनीति” बता रही है, वहीं भाजपा इसे अपने प्रशासन की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।

कालिंदी कुंज से यमुना का सच

इन दावों की हकीकत जानने के लिए Neo Politico की टीम ने कालिंदी कुंज के पास यमुना के तट का दौरा किया। राजनीति से इतर सबके अपने दावों को परखने के लिए जब हम नदी किनारे पहुंचे तो पहली नज़र में नज़ारा वाकई बदला हुआ लगा। जहां कभी जहरीला झाग और दुर्गंध होती थी, अब वहां साफ़ बहता पानी दिखाई दे रहा था।

कई बच्चे नदी में नहा रहे थे, कुछ स्थानीय लोग स्नान कर रहे थे, और किनारे पर किसी भी तरह की जहरीली परत नज़र नहीं आई। हमें लगा कि शायद डिफॉर्मर छिड़कने से हमें झाग नहीं दिख रही। लेकिन केमिकल के इस्तेमाल से पानी में हैवी मेटल्स की संख्या में बड़ा उछाल आता है। इसलिए हमने नदी के किनारे और बीचों-बीच से पानी के दो नमूने लिए।

दोनों ही नमूने पारदर्शी और लगभग स्वच्छ दिखाई दिए। लगभग एक घंटे बाद जब पानी को ग्लास में रखा गया, तो केवल थोड़ी-सी रेत नीचे जमी दिखी, कोई झाग या काला पदार्थ नहीं था।

आंखों से साफ, लेकिन आंकड़े बताते हैं असल कहानी

इसके बाद हमने यमुना के पानी की TDS (Total Dissolved Solids) जांच की। मीटर ने कई जगहों से लिए गए सैंपल के 950 से 1320 के बीच की रीडिंग दिखाई। यह स्तर मैदानों के भूजल से मिलता-जुलता है। हालाँकि अभी भी यह पीने योग्य नहीं है, परंतु पहले की तुलना में यमुना का जल काफी हद तक सुधरा हुआ है। यमुना के पानी का पीने योग्य की आशा करना अभी बेमानी ही होगी।

बता दें कि इस टेस्ट में ऑक्सीजन स्तर (DO) की जांच शामिल नहीं थी, जो नदी के जीव-जंतुओं के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। फिर भी, इतने वर्षों के प्रदूषण के बाद अब पानी में यह परिवर्तन अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि सफाई कार्य का प्रभाव ज़मीन पर नज़र आने लगा है।

फिलहाल पहले की तरह ही अभी भी कोई एक्वाटिक एनिमल हमें नदी में नहीं दिखाई दिया, न ही किनारों के पास छोटे जल-जीव तैरते हुए दिखाई दिए।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि “इस बार छठ पूजा में पानी पहले से कहीं ज्यादा साफ था।” एक बुजुर्ग ने बताया कि पहले झाग में उतरकर पूजा करनी पड़ती थी, अब कम से कम नदी में पानी जैसा पानी है।

अब यमुना की हालत में सुधार नज़र आता है। जहरीला झाग नहीं दिखाई दे रहा तो वहीँ पानी से दुर्गन्ध भी खत्म हुई है, और TDS स्तर नियंत्रित सीमा में है।

लेकिन जब तक ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने, औद्योगिक अपशिष्ट रोकने और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट्स की निगरानी पर कड़ा अमल नहीं होता, तब तक यमुना की सफाई को “पूर्ण सफलता” नहीं कहा जा सकता।

+ posts

Leave a Reply

Previous Story

13 साल पहले मरा समझकर गंगा में बहाया बेटा, अब अचानक लौटा जिंदा—मां-बाप की खुशी का ठिकाना नहीं, पूरे गांव में उमड़ी भीड़

Next Story

मुआवजे के लिए SC-ST एक्ट और गैंगरेप में फंसाया; 4 साल बाद कोर्ट ने किया रिहा, कहा – जिंदगी बर्बाद

Latest from New Delhi