लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विशेष एससी/एसटी अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अधिवक्ता परमानंद गुप्ता को फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में 12 साल की कठोर कैद और ₹45,000 जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने पाया कि गुप्ता ने अपनी सहयोगी, जो कि अनुसूचित जाति की महिला थीं, के माध्यम से झूठी FIR दर्ज करवाई और बाद में सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि भी हड़प ली। वह इससे पहले भी एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग के एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ मामला
फरवरी 2023 में परमानंद गुप्ता ने अपनी महिला सहयोगी पूजा रावत के साथ मिलकर लखनऊ के चिनहट थाने में एक FIR दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि विपिन यादव, राम गोपाल यादव, भगीरथ पंडित और मोहम्मद तासुक ने पूजा पर हमला किया और जातिसूचक गालियां दीं। इस आरोप को मजबूत करने के लिए पूजा ने तत्कालीन एसीपी अभय प्रताप मल्ल के सामने भी यही बयान दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सामाजिक कल्याण विभाग ने एससी/एसटी एक्ट के तहत पूजा को ₹75,000 की आर्थिक सहायता भी दी, जो सीधे उनके खाते में डाली गई।
कोर्ट में बदल गई गवाही
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 2 जून 2025 को पूजा रावत ने लखनऊ की अदालत में अपने पहले दिए गए बयान से पूरी तरह पलटते हुए बताया कि उन्होंने दबाव में आकर झूठी गवाही दी थी। उन्होंने कहा कि परमानंद गुप्ता ने उनसे गलत बयान दिलवाया और एफआईआर में दर्ज घटना कभी हुई ही नहीं। इतना ही नहीं, पूजा ने यह भी बताया कि सरकार से मिले ₹75,000 की पूरी राशि भी गुप्ता ने उनसे ले ली थी। इस खुलासे के बाद अदालत ने पूरे मामले की सच्चाई को दोबारा परखा और आरोपियों की बेगुनाही की पुष्टि हुई।
अदालत का अंतिम फैसला
विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने अपने फैसले में परमानंद गुप्ता को IPC की धारा 193 के तहत झूठी गवाही देने के लिए तीन साल की कठोर कैद और ₹10,000 जुर्माना, धारा 420 के तहत धोखाधड़ी के लिए चार साल की कैद और ₹10,000 जुर्माना, तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत पांच साल की कठोर कैद और ₹25,000 जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएँ एक के बाद एक चलेंगी, जिससे कुल सजा 12 साल की बनती है। वहीं, गुप्ता द्वारा पहले से जेल में बिताए गए समय को सजा से समायोजित करने का निर्देश भी दिया गया। चारों आरोपी — विपिन यादव, राम गोपाल यादव, भगीरथ पंडित और मोहम्मद तासुक — को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।
