प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर झूंसी थाने में दर्ज हुई है। मामले में उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात लोगों के नाम भी शामिल हैं। यह कार्रवाई POCSO कोर्ट के आदेश के बाद की गई। शिकायत आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने की है, जो जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं।
POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर
जानकारी के मुताबिक, झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा ने बताया कि POCSO कोर्ट के निर्देश पर यह एफआईआर दर्ज की गई। आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने दो नाबालिग बच्चों को पेश करते हुए यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए। अदालत में बच्चों के बयान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से दर्ज किए गए। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था। बाद में अदालत ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया, क्योंकि आरोप जिस व्यक्ति पर लगे हैं, वे एक प्रमुख धार्मिक पद पर आसीन हैं।
शंकराचार्य ने आरोपों को बताया झूठा और साजिश
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरी तरह से मनगढ़ंत और राजनीतिक व व्यक्तिगत दुश्मनी का नतीजा है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी को “हिस्ट्रीशीटर” बताया। उनका दावा है कि आशुतोष ब्रह्मचारी पर पहले से 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में दंगा, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली, धोखाधड़ी, जालसाजी, दुष्कर्म, साइबर अपराध और कई विशेष कानूनों के तहत मुकदमे शामिल हैं। दस्तावेजों का हवाला देते हुए उनके समर्थकों ने दावा किया कि आशुतोष पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में केस दर्ज हैं, जिनमें धारा 147, 148, 149 (दंगा), 153A (समूहों में वैमनस्य फैलाना), 307 (हत्या का प्रयास), 376 और 376D (दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म), 386 और 389 (जबरन वसूली), 420 (धोखाधड़ी), 466 से 471 (जालसाजी), 506 और 509 (धमकी और महिला की मर्यादा का अपमान) शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा आईटी एक्ट और अन्य विशेष कानूनों के तहत भी केस होने का दावा किया गया है।
वैचारिक विवाद और साजिश का आरोप
शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि यह मामला उनके और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच लंबे समय से चल रहे वैचारिक और सार्वजनिक विवाद का नतीजा है। उनका कहना है कि दोनों के बीच पहले भी कई बार बयानबाजी हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केस उन्हें सरकार के खिलाफ गाय संरक्षण और सनातन मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने से रोकने के लिए दर्ज कराया गया है। उन्होंने कहा कि “यह हमें चुप कराने की कोशिश है।” हालांकि उन्होंने न्याय प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आएगी और अगर मामला झूठा है तो वह साबित हो जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस सरकार के अधीन काम करती है, इसलिए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच जरूरी है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि वह कोर्ट के आदेश और कानून के मुताबिक ही कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच सबूतों, गवाहों के बयान और कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी। सार्वजनिक बयान या आरोप-प्रत्यारोप से जांच प्रभावित नहीं होगी।
