एमपी हाईकोर्ट का SC ST एक्ट में पत्रकारों को राहत से इंकार, शिक्षिका को बताया था चिंदी चोर

इंदौर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने दो पत्रकारों को राहत देने से इनकार कर दिया है। इन पत्रकारों पर आरोप है कि उन्होंने एक दलित महिला अध्यापिका को खबर में ‘चिंदी चोर’ (छोटा चोर) कहा था। कोर्ट ने माना कि यह शब्द अपमानजनक है और इसमें जातिगत अपमान का इरादा साफ दिखाई देता है।

क्या है मामला

मार्च 2025 में यह घटना धार जिले के सरदारपुर इलाके के एक सरकारी स्कूल की है। पत्रकार मुकेश कुमावत और मोहित जाट खबर कवर करने स्कूल पहुंचे थे। उनका दावा था कि स्कूल में छात्रों से अवैध वसूली हो रही थी। उन्होंने परीक्षा के दौरान महिला अध्यापिका से इस बारे में सवाल किए। जब उन्हें वीडियो रिकॉर्डिंग से रोका गया, तो वे स्कूल से बाहर चले गए। शिक्षिका का आरोप है कि जब वह घर लौट रही थीं, तभी पत्रकारों ने रास्ते में उन्हें रोका, बहस की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके कुछ दिनों बाद दैनिक सच मीडिया (जोधपुर से प्रकाशित) में 26 मार्च 2025 को खबर छपी, जिसमें शिक्षिका को ‘चिंदी चोर’ कहा गया। कोर्ट ने कहा कि “चिंदी चोर” का मतलब “छोटा चोर” या “मक्खीचूस चोर” होता है, जो किसी को अपमानित करने के लिए कहा जाता है। इससे यह साबित होता है कि अपमान का इरादा था।

पत्रकारों की सफाई

पत्रकारों ने कहा कि उन्होंने कोई गलत बात नहीं कही। वे सिर्फ स्कूल में हो रही अवैध वसूली की खबर कवर करने गए थे। उन्होंने कहा कि शिक्षिका ने खुद पर लगे आरोपों से बचने के लिए उन पर झूठा केस दर्ज कराया है। दोनों ने खुद को निर्दोष बताया।

कोर्ट का फैसला

न्यायमूर्ति गजेन्द्र सिंह ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही लगते हैं। चूंकि शिक्षिका अनुसूचित जाति वर्ग से हैं और पत्रकार इस वर्ग से नहीं आते, इसलिए एससी/एसटी एक्ट की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। पत्रकारों की ओर से अधिवक्ता मयंक मिश्रा ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता राजेन्द्र सिंह सूर्यवंशी ने पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि अभी के हालात को देखते हुए पत्रकारों को कोई राहत नहीं दी जा सकती, हालांकि वे खुद को निर्दोष बताते हैं और दावा करते हैं कि वे सिर्फ अपनी पत्रकारिता कर रहे थे।

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