प्रशांत किशोर पर SC-ST Act का केस दर्ज कराने थाने पहुंची भीम आर्मी: बेगूसराय (बिहार) में ‘चोरी-चमारी’ शब्द पर भड़का दलित समाज, कहा- दोहराया जातिगत अपमान

बेगूसराय: बिहार जन सुराज के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC-ST Act) के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगा है।
भीम आर्मी के कार्यकर्ता बेगूसराय के एससी-एसटी थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन सौंपा। आरोप है कि प्रशांत किशोर ने एक टीवी इंटरव्यू में “चोरी-चमारी” जैसे जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर दलित समुदाय का अपमान किया है।

बेगूसराय के एससी-एसटी थाना में भीम आर्मी ने दिया आवेदन

शनिवार को भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष विकास कुमार के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता बेगूसराय के एससी-एसटी थाना परिसर पहुंचे। उन्होंने थाना अध्यक्ष रवि रंजन को आवेदन सौंपते हुए कहा कि 23 सितंबर को एक टीवी चैनल पर दिए गए इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से “चोरी-चमारी” शब्द कहा। आवेदन में कहा गया है कि यह शब्द अनुसूचित जाति (चमार समुदाय) का अपमान करने वाला है और इससे पूरे दलित समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। विकास कुमार ने आवेदन में यह भी लिखा है कि यह पहली बार नहीं है जब प्रशांत किशोर ने ऐसा अपमानजनक बयान दिया हो। उनका आरोप है कि इससे पहले भी प्रशांत किशोर ने चुहरा समाज को लेकर “चोर चुहरा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। “ऐसे बयानों से दलित समाज को बार-बार नीचा दिखाया जा रहा है। प्रशांत किशोर जानबूझकर सार्वजनिक मंचों पर जातिसूचक शब्द बोलते हैं,”
विकास कुमार ने कहा।

“प्रशांत किशोर पॉलिटिकल फ्रॉड हैं” – भीम आर्मी नेता

थाने के बाहर मीडिया से बात करते हुए भीम आर्मी जिलाध्यक्ष विकास पासवान ने प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “प्रशांत किशोर राजनीतिक धोखेबाज़ हैं। वे बार-बार सार्वजनिक मंचों पर ऐसे शब्द बोलते हैं जो दलित समाज के सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं। यह अपराध है और इसके लिए उन्हें सजा मिलनी चाहिए।” भीम आर्मी ने मांग की है कि SC-ST Act 1989 की धारा 3(1)(A) और 3(1)(S) के तहत प्रशांत किशोर पर केस दर्ज किया जाए। विकास पासवान ने कहा कि प्रशांत किशोर लोकतंत्र और संविधान का मुखौटा पहनकर अपने राजनीतिक बिजनेस को सेट करने आए हैं। उनका आरोप था कि प्रशांत किशोर दलितों के वोट को बांटने की रणनीति बना रहे हैं और इस प्रक्रिया में बार-बार जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करके समाज में नफरत फैला रहे हैं। “वे वोटकटवा की भूमिका निभा रहे हैं, लगातार दलित नेताओं और समाज को टारगेट कर रहे हैं। यह सब अपने फायदे के लिए किया जा रहा है,”
उन्होंने कहा।

पूरे बिहार में आंदोलन की चेतावनी

भीम आर्मी के नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ बेगूसराय का मामला नहीं है। बिहार प्रदेश कमेटी के आह्वान पर राज्य के सभी 38 जिलों में एससी-एसटी थाना में इसी तरह के आवेदन एक साथ दिए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशांत किशोर पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो पूरे बिहार में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। “हम जहां-जहां उनकी सभा या जन संवाद होगा, वहां जाकर विरोध करेंगे। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा,” विकास पासवान ने कहा। इस मामले में एससी-एसटी थाना अध्यक्ष रवि रंजन ने पुष्टि करते हुए कहा, “भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष द्वारा आवेदन दिया गया है जिसमें प्रशांत किशोर पर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने की मांग की गई है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद नियम के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

बेगूसराय से उठी चिंगारी, अब बढ़ रहा विरोध

बेगूसराय में शुरू हुआ यह मामला अब राज्यभर में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। जन सुराज की बैठकों में आने वाले दिनों में दलित संगठनों के विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। कई दलित संगठनों का कहना है कि प्रशांत किशोर लगातार जातिगत शब्दों का इस्तेमाल करके समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं।

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