वाराणसी: उत्तर प्रदेश के बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और निलंबित PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने SC-ST एक्ट को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा ऐलान किया है। वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात और आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने कहा कि यदि 6 फरवरी तक SC-ST एक्ट वापस नहीं लिया गया, तो 7 फरवरी से दिल्ली में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने इस कानून को देश का सबसे बड़ा “काला कानून” बताया।
शंकराचार्य से मुलाकात, काशी से भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक हालात पर चर्चा
रविवार शाम अलंकार अग्निहोत्री वाराणसी पहुंचे और केदारघाट स्थित विद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं थी, बल्कि एक शुभ संयोग था। इस दौरान शंकराचार्य के साथ देश की सामाजिक परिस्थितियों और मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि इससे पहले प्रयागराज में शंकराचार्य ने उन्हें आमंत्रित किया था, लेकिन समय की कमी के कारण वह वहां नहीं जा सके। शंकराचार्य के काशी आगमन पर उन्हें मुलाकात का अवसर मिला। उन्होंने यह भी कहा कि काशी से उनका गहरा व्यक्तिगत और भावनात्मक जुड़ाव है, क्योंकि उन्होंने आईआईटी बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की है, इसलिए यहां आना उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
SC-ST एक्ट को बताया “काला कानून”, 6 फरवरी की डेडलाइन और दिल्ली घेराव की चेतावनी
मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1989 में लागू किया गया SC-ST एक्ट देश का सबसे बड़ा काला कानून है। उनके अनुसार इस कानून के तहत दर्ज होने वाले लगभग 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं, जिनकी वजह से समाज के बड़े हिस्से को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि SC-ST एक्ट को खत्म करना ही उनकी लड़ाई का सबसे बड़ा मुद्दा है। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए रेगुलेशन पर रोक लगा दी हो, लेकिन असली समस्या SC-ST एक्ट ही है। उन्होंने चेतावनी दी कि 6 फरवरी आखिरी तारीख है और अगर तब तक यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो 7 फरवरी से दिल्ली में आंदोलन किया जाएगा। अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो केंद्र सरकार को “उखाड़ फेंका जाएगा” और उसे “चार्टर्ड प्लेन में बिठाकर गुजरात वापस भेज दिया जाएगा।”
केंद्र सरकार पर आरोप, इस्तीफे की वजह और UGC रेगुलेशन पर बयान
जब उनसे पूछा गया कि पहले उनका विवाद राज्य सरकार से जुड़ा बताया जा रहा था और अब वह केंद्र सरकार को निशाना क्यों बना रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई कभी भी राज्य सरकार से नहीं थी। उनके मुताबिक असली जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है और वही इस पूरे मुद्दे के लिए जवाबदेह है। अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं और उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य प्रशासन बहुत ज्यादा दबाव में काम कर रहा है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि राज्य का सारा फंड गुजरात भेज दिया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के पवित्र स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनके अनुसार जब उन्होंने सनातन संस्कृति के प्रतीकों का अपमान होते देखा, तो वह इसे सहन नहीं कर सके और इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया। 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाए जाने के बाद भी अलंकार अग्निहोत्री ने शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव से जुड़े प्रावधानों के संस्थागत दुरुपयोग की बात कही थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ऐसी प्रथाएं जारी रहीं, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं और देश में आंतरिक अशांति भी फैल सकती है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा था कि जाति-आधारित भेदभाव को कभी भी एक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और इसे केवल सही शब्दावली और संवाद तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।
