सरकार ने एक्स और इंस्टाग्राम से पीएम मोदी पर व्यंग्य व आलोचना वाली पोस्ट हटाने को कहा, यूजीसी इक्विटी नियमों पर भी कार्रवाई

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने हाल के समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम को कई पोस्ट हटाने के आदेश दिए हैं। ये पोस्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्य, आलोचना या मज़ाक करने वाले थे, और कुछ पोस्ट यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नए इक्विटी रेगुलेशंस के खिलाफ भी थे। पिछले एक महीने में कई ऐसे पोस्ट हटाए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री पर बनाए गए कार्टून, व्यंग्यात्मक वीडियो और सरकार की नीतियों की आलोचना शामिल थी।

पिछले महीने कई पोस्ट और कार्टून हटाए गए

रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक महीने में X से कई पोस्ट हटाए गए। इनमें सबीर भाटिया द्वारा किया गया एक पोस्ट भी शामिल था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक संस्कृत सुभाषित के वायरल गलत उच्चारण का जिक्र किया गया था। इसके अलावा भारत में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की आलोचना करने वाली पोस्ट और प्रधानमंत्री को लेकर बनाए गए दो एनिमेटेड व्यंग्यात्मक कार्टून भी हटाए गए। अखबार द हिंदू ने प्रभावित यूज़र्स द्वारा साझा किए गए टेकेडाउन आदेशों की समीक्षा में ऐसे दर्जनों पोस्ट पाए, जिन्हें हटाया गया था। हालांकि इन आदेशों की पूरी संख्या सामने नहीं आई है, क्योंकि ये आदेश गोपनीय होते हैं। सोशल मीडिया कंपनियां इन आदेशों का पालन करते हुए पोस्ट को भारत में अदृश्य कर देती हैं, जबकि वे दूसरे देशों में दिखाई देते रहते हैं।

टेकडाउन आदेशों में तीन गुना बढ़ोतरी, कई अकाउंट भी रोके गए

रिपोर्ट के मुताबिक मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग ने इस मामले में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। वहीं मेटा प्लेटफॉर्म्स और X ने भी टिप्पणी करने से इनकार किया। मेटा के आंकड़ों के अनुसार 2025 की पहली छमाही में स्थानीय स्तर पर किए गए टेकडाउन दो साल पहले की तुलना में लगभग तीन गुना बढ़ गए। जब न्यूज वेबसाइट द वायर ने प्रधानमंत्री मोदी पर दो व्यंग्यात्मक म्यूजिक वीडियो पोस्ट किए, तो उन्हें भी X और इंस्टाग्राम दोनों पर टेकडाउन नोटिस मिला। इसके बाद जब वेबसाइट के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने दूसरे कार्टून को दोबारा पोस्ट किया, तो वह पोस्ट भी हटा दी गई। वहीं इंडियन नेशनल कांग्रेस ने शिकायत की कि फरवरी में उनके नौ AI-जनरेटेड पोस्ट (जिन पर AI लिखा हुआ था) भी हटाए गए। यह स्पष्ट नहीं है कि हाल के हफ्तों में कुल कितने टेकडाउन आदेश जारी किए गए। पहले X इन आदेशों को एक थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं करता। अधिकारियों के अनुसार इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की धारा 69A के तहत जारी आदेश गोपनीय होते हैं। एक इंडस्ट्री स्रोत के मुताबिक इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की धारा 79(3)(B) के तहत जारी आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते, लेकिन सोशल मीडिया कंपनियों के पास इन्हें मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता, क्योंकि पिछले महीने टेकडाउन की समयसीमा घटाकर सिर्फ दो से तीन घंटे कर दी गई है। इंटरनेट विशेषज्ञ और सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी के संस्थापक प्रणेश प्रकाश ने X पर लिखा कि ये टेकडाउन “असंवैधानिक” हैं, क्योंकि यूज़र्स को पहले से कोई नोटिस नहीं दिया जाता। इसी दौरान इंस्टाग्राम पर हिंदू एक्टिविस्ट सार्थक भगत का अकाउंट भी भारत में रोक दिया गया। उनके 2.7 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और उन्होंने हाल ही में दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान 26 वर्षीय तरुण भूटोलिया की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके अलावा @woke_kashmiri नाम का एक और राइट-विंग अकाउंट, जिसके दो लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, उसे भी बिना किसी स्पष्टीकरण के भारत में रोक दिया गया। इन दोनों अकाउंट्स ने भी यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी) रेगुलेशंस, 2026 के खिलाफ आवाज उठाई थी।

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