उत्तराखंड में धर्मांतरण मामले में बड़ा खुलासा: ₹6000 महीना और ₹2 लाख का लालच, 4 आरोपी गिरफ्तार

उधम सिंह नगर: उत्तराखंड में गरीब और भोले-भाले लोगों को लालच देकर धर्मांतरण कराने के आरोप में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, खटीमा और नानकमत्ता इलाके में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, थारू समाज और अनुसूचित जाति के लोगों को पैसों, इलाज और मदद का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इस मामले में अब तक चार मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

गरीब और कमजोर लोगों को बनाया जा रहा था निशाना

पुलिस को काफी समय से सूचना मिल रही थी कि खटीमा और नानकमत्ता क्षेत्र में गरीब परिवारों और थारू समाज के लोगों को पैसे, इलाज और अन्य सुविधाओं का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आरोप है कि जो लोग धर्म परिवर्तन के लिए तैयार नहीं होते थे, उन्हें डराया-धमकाया जाता था और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती थी। इस मामले में उधम सिंह नगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दान सिंह राणा, जय सिंह राणा, द्रौपदी राणा और सुनील जॉर्ज पास्टर उर्फ सुनील जॉर्ज मसीह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये लोग गरीब परिवारों तक पहुंचकर उनकी आर्थिक परेशानियों और बीमारियों का फायदा उठाने की कोशिश करते थे। आरोप है कि लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के बदले हर महीने ₹6000 और एकमुश्त ₹2 लाख देने का लालच दिया जाता था। साथ ही यह भी भरोसा दिलाया जाता था कि धर्म बदलने के बाद उनकी बीमारी, पारिवारिक समस्याएं और आर्थिक दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच, कई गंभीर आरोप सामने आए

उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय गणपति के अनुसार, 23 मई 2026 को खटीमा कोतवाली में एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति संदीप सिंह राणा, कमलजीत सिंह और दान सिंह राणा उस पर जबरन ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे। विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने के साथ बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। शिकायत के आधार पर खटीमा कोतवाली में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी प्रार्थना सभाओं में लोगों को बुलाते थे, जहां हिंदू धर्म से जुड़ी भ्रामक और अपमानजनक बातें कहकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। आरोप है कि ईसाई धर्म से जुड़ी किताबें बांटी जाती थीं और लोगों को मानसिक रूप से धर्म परिवर्तन के लिए तैयार किया जाता था। यदि कोई विरोध करता था या किसी और को जानकारी देने की बात करता था, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती थी। इसके अलावा, 10 मई 2026 को खटीमा निवासी रामपाल नाम के व्यक्ति ने भी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जय सिंह राणा, द्रौपदी राणा और सुनील जॉर्ज पास्टर लगातार थारू बहुल गांवों और अनुसूचित जाति के गरीब परिवारों को निशाना बना रहे थे।

मोबाइल फोन से मिले अहम सबूत, अन्य आरोपियों की तलाश जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने विशेष पुलिस टीमों का गठन किया। पुलिस अधीक्षक रुद्रपुर और क्षेत्राधिकारी खटीमा की निगरानी में लगातार छापेमारी और तलाश अभियान चलाया गया, जिसके बाद दोनों मामलों में वांछित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने दान सिंह राणा के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है। पुलिस का दावा है कि इस मोबाइल से धर्मांतरण से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं। इनमें प्रार्थना सभाओं की फोटो और वीडियो, लोगों को स्नान कराकर धर्म परिवर्तन कराने से संबंधित सामग्री, पैसों के लेनदेन के स्क्रीनशॉट, धर्मांतरण के लक्ष्य तय करने से जुड़े दस्तावेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। इसके अलावा, शिकायतकर्ता के पति संदीप सिंह को बच्चों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर बुलाने से जुड़ी बातचीत भी मोबाइल में मिली है। फिलहाल पुलिस अन्य नामजद आरोपियों की तलाश कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया जा रहा है और मामले की आगे जांच जारी है।

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